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Saturday, January 1, 2011

चिठ्ठाचर्चा की एकतर्फियत

CCआप चर्चा करें, पर आप एक वाद की तरफदारी करें तो हम जैसे क्या टिपेरें? एक सज्जन नृशंस माओवादी नक्सली हत्यारों के समर्थक/सहायक हैं। एक कोर्ट उन्हे दण्डित करती है तो बहुत पांय पांय मचती है। वैसे भी आजकल समझ का उलटफेर चल रहा है। हम जिसे गद्दार समझते हैं, वह बुद्धिजीवियों की समझ में महान देश भक्त या मानवता भक्त निकलता है। जिसे बुद्धिवादी महान समाजवादी समझते हैं, वह वह देश बेच-खाने वाला निकलता है। जिसे राजनेता समझते हैं वह … लिहाजा बिनायक सेन के मामले में हम जजमेण्टल कैसे बनें? कुछ हिन्दूवादी थामे गये हैं, उनके बारे में भी जजमेण्टल नहीं हैं।

पर यह देखते आये हैं कि यह नक्सलवाद कोई क्रान्ति फ्रान्ति करने वाला नहीं। शुद्ध माफिया है। रंगदारी वसूलक। तरह तरह के असुर इससे जुड़े हैं। कुछ सिद्धान्तवादी भी शायद होंगे। पर वे चीन के इशारे पर तीस साल से खुरपेंच कर रहे हैं। वे अदरवाइज रिकेटी डेमोक्रेसी का रक्त निकाल रहे हैं। साथ साथ जनता का भी। और इनसे आदिवासी का चवन्नी  अठन्नी भर भी कल्याण हुआ हो, लगता नहीं।

Friday, December 10, 2010

ट्रेवलॉग पर फिर

DSC02726मालुम है, लोग सक्षम हैं ट्रेवलॉग आर्धारित हिन्दी में ब्लॉगों के दसियों लिंक ठेल देने में। पर फिर भी विषयनिष्ठ ब्लॉगों की बात करूंगा तो ट्रेवलॉग आर्धारित ब्लॉग उसमें एक जरूर से तत्व होंगे।

बहुत कम यात्रा करता हूं मैं। फिलहाल डाक्टरी सलाह भी है कि न यात्रा करूं रेल की पटरी के इर्द-गिर्द। संकल्प लेने के बावजूद यहां से तीस किलोमीटर दूर करछना भी न जा पाया हूं। फिर भी साध है यात्रा करने और ट्रेवलॉग लिखने की।

ट्रेवलॉग मुझे वह इण्टेलेक्चुअल संतुष्टि देगा, जो आज तक न मिल सकी। और, शर्तिया, साहित्यकार मर्मज्ञ जी, जो कहते हैं कि मैं निरर्थक लिखता हूं, को भी कुछ काम की चीज मिल सकेगी - उनकी कविता के पासंग में/आस पास!

Tuesday, December 7, 2010

विषयनिष्ठ ब्लॉगरों के क्लोज-निट ग्रुप

forbs indiaफॉर्ब्स इण्डिया; जॉन एफ हैरिस, एडीटर इन चीफ पोलिटिको, के सात चुनिन्दा ब्लॉगर्स की लिस्ट देता है:

  1. जोनाथन चैट, न्यू रिपब्लिक पर
  2. हॉट एयर
  3. ग्लेन ग्रीनवाल्ड, सलोन पर
  4. द कॉर्नर, नेशनल रिव्यू पर
  5. फाइवथर्टीएट
  6. द बज़, द सेण्ट पीटसबर्ग टाइम्स पर
  7. द मन्की केज

logo_chaitHot Airfivethirtyeight_main

Thursday, December 2, 2010

ट्वीट्स से विशेषज्ञता

डैम! लीक्स और टेप्स के जमाने में इंस्टेण्ट कमेण्ट्स और इंस्टेण्ट विशेषज्ञता का विस्तार हो रहा है। एनडीटीवी का दस बजे का कार्यक्रम देख #बरखागेट पर ट्विटर कमेण्ट्स की भरमार हो गयी है। वाल स्ट्रीट जर्नल का इण्डिया रीयलटाइम का ब्लॉग-छत्ता फटाफट पोस्ट/कमेण्ट/पोल्स दिये जा रहा है।

Tuesday, November 23, 2010

टिप्पणियों का प्रणामवादी युग

namaste

टिप्पणियों में प्रणामवादी युग का प्रारम्भ

टिप्पणियों का साधुवादी युग समाप्त हुआ। रवीन्द्र प्रभात चाहें तो इसे अपने इतिहासनामे में दर्ज कर लें। आई नो, समीरलाल शायद आपत्ति दर्ज करायें। शायद ना भी करायें - शादी-वादी के इंतजाम में बिजी हों तो। सुकुल चाहें तो साहित्त वालों से पुछवा लें। ज्यादा डाऊट लगे तो नामवर सिंह जी; या जे हे ने से, नये सम्मेलन में जो कोई कवी जी आये थे, उनका विचार भी ले लें। अपुन को कोई फरक नहीं पड़ता।

Sunday, November 21, 2010

अखिल भारतीय हिन्दी ब्लॉगिंग सम्मेलन, शिवकुटी, इलाहाबाद

अखिल भारतीय हिन्दी ब्लॉगिंग सम्मेलन हुआ, काहे से कि इसमें यूपोरियन और कलकत्तन प्रतिनिधित्व था। और कई महान ब्लॉगर आ नहीं पाये। उन तक समय से निमन्त्रण नहीं पंहुच पाया। मच्छर भगाने के लिये हाई पावर हिट का प्रयोग किया गया था। वातानुकूलित कमरे की व्यवस्था थी, पर जाड़ा शुरू होने के कारण बिजली का खर्चा बचा लिया गया।

कुल दो लोग थे। बोलें तो वरिष्ठ। इनमें शिवकुमार मिश्र तो महान ब्लॉगर हैं। आशा है कि वे मुझे टिप्पणी में महान बतायेंगे।

इन्होने हिन्दी ब्लॉगिंग के भूत वर्तमान भविष्य पर चर्चा की। सर्वसम्मति से यह तय पाया गया कि ब्लॉगरों की संख्या एक करोड़ तक ले जाने के लिये सघन/व्यापक टिप्पणी अभियान जरूरी है। और एक करोड़ ब्लॉगर होने के बाद ही हिन्दी ब्लॉगिंग का कोई आर्थिक पक्ष हो सकेगा।

 

सम्मेलन का उत्तरार्ध, अगर समय निकल पाया तो, लंचोपरान्त होगा। Open-mouthed smile 


अपडेट: लंच के आकार-प्रकार को देखते हुये सर्वसम्मति से सम्मेलन समाप्त मान लिया गया। सोना ज्यादा महत्वपूर्ण समझा गया। वैसे भी मुझे यह मलाल है कि मुझे महान नहीं माना शिवकुमार मिश्र ने! Smile  

Tuesday, November 9, 2010

करछना की गंगा

मैने देखा नहीं करछना की गंगा को। छ महीने से मनसूबे बांध रहा हूं। एक दिन यूं ही निकलूंगा। सबेरे की पसीजर से। करछना उतरूंगा। करछना स्टेशन के स्टेशन मास्टर साहब शायद किसी पोर्टर को साथ कर दें। पर शायद वह भी ठीक नहीं कि अपनी साहबी आइडेण्टिटी जाहिर करूं!

Thursday, September 16, 2010

“रुद्र” काशिकेय पर प्रथम टीप

अपनी मूर्खता पर हंसी आती है। कुछ वैसा हुआ – छोरा बगल में ढुंढाई शहर में! 

राहुल सिंह जी की टिप्पणी थी टल्लू वाली पोस्ट पर -

अपरिग्रही टल्‍लू ने जीवन के सत्‍य का संधान कर लिया है और आपने टल्‍लू का, बधाई। जगदेव पुरी जी से आपकी मुलाकात होती रहे। अब आपसे क्‍या कहें कि एक थे शिव प्रसाद मिश्र "रूद्र" काशिकेय

Tuesday, September 14, 2010

हिन्दी में पुस्तक अनुवाद की सीमायें

दो पुस्तकें मैं पढ़ रहा हूं। लगभग पढ़ ली हैं। वे कुछ पोस्ट करने की खुरक पैदा कर रही हैं।

खुरक शायद पंजाबी शब्द है। जिसका समानार्थी itching या तलब होगा।

पहली पुस्तक है शिव प्रसाद मिश्र “रुद्र” काशिकेय जी की – बहती गंगा। जिसे पढ़ने की प्रेरणा राहुल सिंह जी से मिली। ठिकाना बताया बोधिसत्त्व जी ने। विलक्षण पुस्तक! इसके बारे में बाद में कहूंगा। आगे किसी पोस्ट में।

Sunday, August 29, 2010

ट्विट ट्विट ट्वीट!

दीपक बाबा जी कहते हैं - 

ज्ञानदत्त जी, आपके ब्लॉग पर तो ट्वीट चल रहा है ..... चार लाइन आप लिख देते हो बाकी ३०-४० टिप्पणियाँ जगह पूरी कर देती हैं. कुल मिला कर हो गया एक लेख पूरा.
शायद बुरा मान जाओ ......... पर मत मानना ....... इत्ता तो कह सकते हैं.

दीपक जी ने मेरी सन २००७-२००८ की पोस्टें नहीं देखीं; टिप्पणी के हिसाब से मरघटीय पोस्टें!

और फिर दिव्या कहती हैं -

Wednesday, August 25, 2010

गौतम शंकर बैनर्जी

उस दिन शिव कुमार मिश्र ने आश्विन सांघी की एक पुस्तक के बारे में लिखा, जिसमें इतिहास और रोमांच का जबरदस्त वितान है। सांघी पेशेवर लेखक नहीं, व्यवसायी हैं।

कुछ दिन पहले राजीव ओझा ने आई-नेक्स्ट में हिन्दी ब्लॉगर्स के बारे में लिखा जो पेशेवर लेखक नहीं हैं – कोई कम्प्यूटर विशेषज्ञ है, कोई विद्युत अभियंता-कम-रेलगाड़ी प्रबन्धक, कोई चार्टर्ड अकाउण्टेण्ट, कई वैज्ञानिक, इंजीनियर, प्रबन्धक और टेक्नोक्रेट हैं। और बकौल राजीव टॉप ब्लॉगर्स हैं।

क्या है इन व्यक्तियों में?

Saturday, August 14, 2010

बिम्ब, उपमा और न जाने क्या!?


कल सुकुल कहे कि फलानी पोस्ट देखें, उसमें बिम्ब है, उपमा है, साहित्त है, नोक झोंक है।

हम देखे। साहित्त जो है सो ढेर नहीं बुझाता। बुझाता तो ब्लॉग लिखते? बड़ा बड़ा साहित्त - ग्रन्थ लिखते। ढेर पैसा पीटते। पिछलग्गू बनाते!

Wednesday, June 9, 2010

बिल्लियाँ

बिल्लियाँ आरोपों के काल में कुत्ते बिल्लियों के ऊपर लिखे गये ब्लॉग हेय दृष्टि से देखे गये थे। इसलिये जब बिटिया ने बिल्ली पालने के लिये हठ किया तो उसको समझाया कि गाय, कुत्ते, बिल्ली यदि हिन्दी ब्लॉग में हेय दृष्टि से देखे जाते हैं तो उनको घर में लाने से मेरी भी हिन्दी ब्लॉगिंग प्रतिभा व रैंकिंग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

बालमन पशुओं के प्रेम व आत्मीयता से इतने ओतप्रोत रहते हैं कि उन्हें ब्लॉगिंग के सौन्दर्यबोध का ज्ञान ही नहीं। बिटिया ने मेरे तर्कों पर भौंहे सिकोड़कर एक अवर्णनीय विचित्र सा मुँह बनाया और साथ ही साथ याद दिलाया कि कुछ दिनों पहले तक इसी घर में सात गायें और दो कुत्ते रहते थे। यह देख सुन कर मेरा सारा ब्लॉगरतत्व पंचतत्व में विलीन हो गया।

Sunday, May 23, 2010

ब्लॉग पढ़ने की चीज है?

मेरे मस्तिष्क में दायीं ओर सूजन होने के कारण बायें हाथ में शैथिल्य है। उसके चलते इस ब्लॉग पर गतिविधि २५ मई से नहीं हो पा रही, यद्यपि मन की हलचल यथावत है। अत: सम्भवत: १५-२० जून तक गतिविधि नहीं कर पाऊंगा। मुझे खेद है।

ब्लॉग लिखे जा रहे हैं, पढ़े नहीं जा रहे। पठनीय भी पढ़े नहीं जा रहे। जोर टिप्पणियों पर है। जिनके लिये पोस्ट ब्राउज करना भर पर्याप्त है, पढ़ने की जरूरत नहीं। कम से कम समय में अधिक से अधिक टिप्पणियां – यही ट्रेण्ड बन गया है।

Tuesday, May 11, 2010

कौन बेहतर ब्लॉगर है शुक्ल या लाल?

समीर लाल अपने टिपेरने की कला पर बेहतर फॉलोइंग रखते हैं। उनकी टिप्पणियां जबरदस्त होती हैं। पर उनकी पोस्टों का कण्टेण्ट बहुत बढ़िया नहीं है। कभी कभी तो चुकायमान सा लगता है। उनकी हिन्दी सेवा की झण्डाबरदारी यूं लगती है जैसे अपने को व्यक्ति नहीं, संस्था मानते हों!

अनूप शुक्ल की पोस्टें दमदार होती थीं, होती हैं और होती रहेंगी (सम्भावना)। चिठ्ठा-चर्चा के माध्यम से मुरीद भी बना रखे हैं ढेरों। पर उनकी हाल की झगड़े बाजी जमती नहीं। दम्भ और अभिमान तत्व झलकता है। मौज लेने की कोई लक्ष्मण रेखा तय नहीं कर पाये पण्डित।

Sunday, May 9, 2010

बापीयॉटिक पोस्टों की दरकार है!

Baapi2 बापी ओडीसा जाने के बाद क्या कर रहा है? मैं सतीश पंचम जी से फॉलो-अप का अनुरोध करता हूं।

बापी वाली पोस्ट एक महत्वपूर्ण पोस्ट है हिन्दी ब्लॉगिंग की – भाषा और विषय वस्तु में नया प्रयोग। यह बिना फॉलो-अप के नहीं जाना चाहिये। अगर आपने सतीश जी की उक्त पोस्ट नहीं पढ़ी है तो कृपया पढ़ें। बापी मुम्बई की जिन्दगी की करमघसेटी को किन तर्कों के साथ तिलांजलि देता है, और किस भाषा में, वह पढ़ने की चीज है। 

रिवर्स माइग्रेशन एक स्वप्न की वस्तु नहीं है। अर्थव्यवस्था में अच्छी वृद्धि दर के साथ समृद्धि छोटे शहरों/गांवों/कस्बों में पसीजनी चाहिये। अन्यथा असमान विकास अपने को झेल नहीं पायेगा।

Monday, April 26, 2010

महानता से छूटा तो गंगा को भागा

महानता से पगहा तुड़ा गंगा तट पर भागा। देखा कि तट के पास वाली मुख्य धारा में पानी और कम हो गया है। अब तो एक कुक्कुर भी आधा तैरता और आधा पैदल चलता पार कर टापू पर पंहुच गया। पानी कम होने के साथ किनारे छोडती गंगा माई की गंदगी और झलकने लगी।

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Saturday, April 10, 2010

कॉज बेस्ड ब्लॉगिंग (Cause Based Blogging)

क्या करें, हिन्दी सेवा का कॉज लपक लें? पर समस्या यह है कि अबतक की आठ सौ से ज्यादा पोस्टों में अपनी लंगड़ी-लूली हिन्दी से काम चलाया है। तब अचानक हिन्दी सेवा कैसे कॉर्नर की जा सकती है?

हिन्दू-मुस्लिम एकता की बात हो रही है। यह एक नोबल कॉज (noble cause) है। लोग टपकाये जा रहे हैं पोस्ट। वे सोचते हैं कि अगर वे न टपकायें पोस्ट तो दंगा हो जाये। देश भरभरा कर गिर जाये। लोग बाग भी पूरे/ठोस/मौन/मुखर समर्थन में टिपेरे जा रहे हैं – गंगा-जमुनी संस्कृति (क्या है?) लहलहायमान है। इसी में शिवकुमार मिश्र भी फसल काट ले रहे हैं।

उधर सुरेश चिपलूणकर की उदग्र हिन्दुत्व वादी पोस्टों पर भी लोग समर्थन में बिछ रहे हैं। केसरिया रंग चटक है। शुद्ध हरे रंग वाली पोस्टें पढ़ी नहीं; सो उनके बारे में कॉण्ट से!

Sunday, April 4, 2010

परस्पर संवादात्मक ब्लॉगिंग – असफल प्रयोग!

DisQus मेरे बारे में अनूप शुक्ल का पुराना कथन है कि मैं मात्र विषय प्रवर्तन करता हूं, लोग टिप्पणी से उसकी कीमत बढ़ाते हैं। यह कीमत बढ़ाना का खेला मैने बज़ पर देखा। एक सज्जन ने कहा कि यह सामुहिक चैटिंग सा लग रहा है। परस्पर संवाद। पोस्ट नेपथ्य में चली जाती है, लोगों का योगदान विषय उभारता है। ब्लॉग पर यह उभारने वाला टूल चाहिये।

परस्पर संवादात्मक ब्लॉगिंग

DisQusमेरे बारे में अनूप शुक्ल का पुराना कथन है कि मैं मात्र विषय प्रवर्तन करता हूं, लोग टिप्पणी से उसकी कीमत बढ़ाते हैं। यह कीमत बढ़ाना का खेला मैने बज़ पर देखा। एक सज्जन ने कहा कि यह सामुहिक चैटिंग सा लग रहा है। परस्पर संवाद। पोस्ट नेपथ्य में चली जाती है, लोगों का योगदान विषय उभारता है। ब्लॉग पर यह उभारने वाला टूल चाहिये।