Friday, August 20, 2010

जगदेव पुरी

जगदेव पुरी जी शिवकुटी के हनुमान मन्दिर में पूजा कार्य देखते हैं। उम्र लगभग ८५। पर लगते पैंसठ-सत्तर के हैं। यह पता चलते ही कि वे पचासी के हैं, मेरी पत्नीजी ने तुरत एक लकड़ी तोड़ी – आपको नजर न लगे। आप तो सत्तर से ऊपर के नहीं लगते! आप सौ से ऊपर जियें!

हम दोनो ने उनके पैर छुये। हमें अच्छा लगा। उन्हे भी लगा ही होगा। 

इतिहास में घूमना

सवेरे मैं अपने काम का खटराग छेडने से पहले थोडा आस-पास घूमता हूं। मेरा लड़का साथ में रहता है - शैडो की तरह। वह इस लिये कि (तथाकथित रूप से) बीमार उसका पिता अगर लड़खड़ा कर गिरे तो वह संभाल ले। कभी जरूरत नहीं पड़ी; पर क्या पता पड़ ही जाये!

वैसे घूमना सड़क पर कम होता है, मन में ज्यादा। गंगा आकर्षित करती हैं पर घाट पर उतरना वर्जित है मेरे लिये। यूं भी नदी के बारे में बहुत लिख चुका। कि नहीं?

Wednesday, August 18, 2010

निठल्ला

Mags बिना अपना काम किये कैसे जिया जा सकता है? पिछले डेढ़ महीने मेरे लिये बहुत यातनामय रहे, जब मेरी कार्यक्षमता कम थी और सरकारी काम के प्रति पूरा न्याय नहीं हो पा रहा था।

पढ़ा कि कई उच्च मध्य वर्ग की महिलायें स्कूल में मास्टरानियों के पद पर हैं। पर स्कूल नहीं जातीं। अपना हस्ताक्षर कर तनख्वाह उठाती हैं। घर में अपने बच्चों को क्या जीवन मूल्य देती होंगी!?

Monday, August 16, 2010

मेला फिर!

मेला फिर लगेगा। अभी तड़के देखा – तिकोनिया पार्क में झूला लगने लगा है। लगाने वाले अपने तम्बू में लम्बी ताने थे। कल से गहमागहमी होगी दो दिन। सालाना की गहमागहमी।

अनरसा, गुलगुला, नानखटाई, चाट, पिपिहरी, गुब्बारा, चौका, बेलन, चाकू से ले कर सस्तौआ आरती और फिल्मी गीतों की किताबें – सब मिलेगा। मन्दिर में नई चप्पलें गायब होंगी और भीड़ की चेंचामेची में जेबें कटेंगी।

Sunday, August 15, 2010

छोटू सपेरे की मोनी

नागपंचमी के दिन घाट पर कुछ अंधे बैठे थे। सामने कथरी बिछाये। गंगा नहा आते लोग अपनी श्रद्धा वश कुछ अन्न या पैसा उनकी कथरी पर गिराते जा रहे थे।

उन्ही के पास बैठा था एक लड़का। पैंट-बुशशर्ट पहने। कई दिनों से न नहाने से उलझे बाल। बीन और सांप रखने वाली मोनी (बांस की तीलियो से बना गोल डिब्बा) लिये। सामने कथरी पर कुछ पैसे और कुछ अनाज था। हमें देख कर बोला – नागराज भला करेंगे। दीजिये उनके लिये।

अच्छा, दिखाओ जरा नाग।

Saturday, August 14, 2010

बिम्ब, उपमा और न जाने क्या!?


कल सुकुल कहे कि फलानी पोस्ट देखें, उसमें बिम्ब है, उपमा है, साहित्त है, नोक झोंक है।

हम देखे। साहित्त जो है सो ढेर नहीं बुझाता। बुझाता तो ब्लॉग लिखते? बड़ा बड़ा साहित्त - ग्रन्थ लिखते। ढेर पैसा पीटते। पिछलग्गू बनाते!

Sunday, August 1, 2010

रविवार भोर ६ बजे

तख्ती पर बैठे पण्डा। जजमानों के इन्तजार में। गंगा तट पर नहाते पुरुष और स्त्रियां। पण्डा के बाईं ओर जमीन पर बैठा मुखारी करता जवाहिर लाल। गंगा बढ़ी हुई हैं। सावन में ही भदईं गंगा का अहसास!

Wednesday, July 28, 2010

गोपालकृष्ण विश्वनाथ जी का स्वास्थ्य

परसों प्राप्त ई-मेल से श्री गोपालकृष्ण विश्वनाथ जी के स्वास्थ्य के विषय में पता चला:


GV attempting rowing ज्ञानजी,

इस लंबी अवधि की चुप्पी के लिए क्षमा चाहता हूँ।

कई महीनों से ब्लॉग जगत से दूर रहा था। जाल जगत से भी संपर्क सीमित था।

व्यवसाय संबन्धी कठिनाइयों के कारण और स्वास्थ्य अचानक बिगडने के कारण कई अच्छे मित्रों से भी ई मेल संपर्क टूट गया था।

Sunday, July 25, 2010

मॉडर्न भौतिकी और सुंघनी

mdern physics वे जवान और गम्भीर प्रकृति के छात्र हैं। विज्ञान के छात्र। मॉडर्न भौतिकी पढ़ते हैं और उसी की टमिनॉलॉजी में बात करते दीखते हैं। अधिकांशत: ऐसे मुद्दों पर बात करते हैं, जो मुझे और मेरी पत्नीजी को; हमारी सैर के दौरान समझ में नहीं आते। हम ज्यादातर समझने का यत्न भी नहीं करते – हमें तो उनकी गम्भीर मुख मुद्रायें ही पसन्द आती हैं।

शिवकुटी है तो मात्र जवान लड़के दिखाई देते हैं। परदेश होता तो उनकी गोल में एक-आध जवान लड़की भी होती – एक फिल्म की संकल्पना को साकार करती हुई। अभी ज्यादातर के पैरों में हवाई चप्पल या सस्ते जूते होते हैं; परदेश में कुछ ट्रेण्डी कपड़े होते।

उस खाली प्लॉट के पास वे ज्यादा देर तक रुक कर चर्चा करते हैं।

Gyan771-001 Gyan769-001 कभी-कभी उनके द्वारा चर्चित मुद्दे हमारी पकड़ में आ जाते हैं। एक बार वे नमकीन की पन्नी हाथ में लिये नमकीन सेंव बनाने की प्रकिया को मॉडर्न फीजिक्स की टर्मिनॉलॉजी में डिस्कस कर रहे थे। एक दूसरे समय में वे नाइक्विस्ट थ्यॉरम की चर्चा सुंघनी व्यवसाय के सन्दर्भ में कर रहे थे। सहसों वाले प्रसिद्ध सुंघनी व्यवसाई भोलाराम जायसवाल ने कभी नाइक्विस्ट थ्यॉरम के बारे में सुना भी होगा – मुझे भयंकर संदेह है। संदेह ही नहीं, भयंकर विश्वास भी है कि उसे मालूम न होगा!

पर हमारे उन जवान विद्यर्थियों की सीरियसता पर हमें पूरा विश्वास है।

Saturday, July 24, 2010

ब्लॉग चरित्र

शिवकुमार मिश्र का सही कहना है कि ब्लॉग चरित्र महत्वपूर्ण है। बहुत से ब्लॉगर उसे वह नहीं दे पाते। मेरे ब्लॉग का चरित्र क्या है? यह बहुत कुछ निर्भर करता है कि मेरा चरित्र क्या है – वह इस लिये कि आठ सौ से अधिक पोस्टें बिना अपना चरित्र झलकाये नहीं लिख सकता।