Saturday, May 31, 2008

सुलेम सराय का इक्का, बैलगाड़ी और डीजल-पेट्रोल के दाम


Friday, May 30, 2008

भोर का सपना


स्वप्न कभी कभी एक नये वैचारिक विमा (डायमेंशन) के दर्शन करा देते हैं हमें। और भोर के सपने महत्वपूर्ण इस लिये होते हैं कि उनका प्रभाव जागने पर भी बना रहता है। उनपर जाग्रत अवस्था में सोचना कभी कभी हमें एक नया मकसद प्रदान करता है। शायद इसी लिये कहते हैं कि भोर का सपना सच होता है।
भोर का सपना सच होता हो चाहे न होता हो, उसका प्रभाव देर तक चलता है। और सवेरे उठते ही आपाधापी न हो - ट्रेने ठीक चल रही हों, सवेरे दो तीन कप चाय धकेलने का इत्मीनान से समय हो; तो उस स्वप्न पर एक दो राउण्ड सोचना भी हो जाता है। मै‍ यह काम सप्ताहान्त पर कर पाता हूं। पता नहीं आप इस सुख की कितनी अनुभूति कर पाते हैं। अव्वल तो इन्सोम्निया (अनिद्रा) के मरीज को यह सुख कम ही मिलता है। पर नींद की गोली और दो-तीन दिन की नींद के बैकलॉग के होने पर कभी कभी नींद अच्छी आती है। रात में ट्रैन रनिंग में कोई व्यवधान न हो तो फोन भी नींद में खलल नहीं डालते। तब आता है भोर का सपना।

Thursday, May 29, 2008

ब्लॉग के शीर्षक का संक्षिप्तीकरण और फुटकर बातें


Gadi  
मिट्टी की खिलौना गाड़ी - एक बच्चे की कल्पना की ऊड़ान

मैने पाया कि लोगों ने मेरे ब्लॉग का संक्षिप्तीकरण समय के साथ कर दिया है - "हलचल" या "मानसिक हलचल"। मेरे ब्लॉग को मेरे नाम से जोड़ने की बजाय वे इन शब्दों से उसे पुकारते रहे हैं। कभी कभी तो इस प्रकार की टिप्पणियां मिली हैं - "हलचल एक्स्प्रेस आज समय पर नहीं आयी"; अर्थात सवेरे मैने नियत समय पर पोस्ट पब्लिश नहीं की।

मेरा अंग्रेजी के ब्लॉग के शीर्षक में शब्द था म्यूजिंग। उसके समीप पड़ता है "मानसिक हलचल"। लिहाजा मैने इस ब्लॉग के शीर्षक संक्षिप्तीकरण में उसे बना दिया है -

Wednesday, May 28, 2008

"भगवान की बुढ़िया" खतम होने के कगार पर


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बीरबहूटी, रेड वेलवेट माइट या भगवान जी की बुढ़िया

ग्रामीण परिवेश से जुडे पाठको ने तो चित्र देखकर ही इसे पहचान लिया होगा पर शहरी पाठकों के लिये इस जीव को जान पाना मुश्किल है। अभी जैसे ही मानसूनी फुहार आरम्भ होगी नदियों के आस-पास नरम मिट्टी मे लाल मखमली चादर फैल जायेगी। असंख्य छोटे-छोटे जीव जमीन के अन्दर से प्रगट हो जायेंगे। आमतौर पर इस जीव को बीरबहूटी कहा जाता है। इसे रेन इंसेक्ट भी कहा जाता है। तकनीकी रुप से इंसेक्ट या कीट कहलाने के लिये छै पैरो का होना जरुरी है। इसके आठ पैर होते है इसलिये इसे मकोडा या माइट कहा जाता है। इसका अंग्रेजी नाम रेड वेलवेट माइट है। मध्य भारत मे इसे रानी कीड़ा कहा जाता है। बच्चो का यह पसन्दीदा जीव है। वे इसे एकत्रकर डिबियो मे रख लेते हैं फिर उससे खेलते हैं। इसे छूने पर आत्म रक्षा मे यह पैरो को सिकोड लेता है। बच्चे पैर सिकोड़े जीवो को एक घेरे मे रख देते हैं और फिर उनके बीच प्रतियोगिता करवाते हैं। जो पहले पैर बाहर निकालकर भागता है उसे विजेता माना जाता है और उसके मालिक बच्चे को भी यही खिताब मिलता है।

Tuesday, May 27, 2008

ब्लॉग की हॉफ लाइफ


Atom हाफ लाइफ प्योर साइण्टिफिक टर्म है। पहले मैं शीर्षक देना चाहता था "साहित्य की हॉफ लाइफ"। फिर लगा कि ह्यूमैनिटीज के साथ साइंस का घालमेल नहीं होना चाहिये। सो बैक ट्रैक करते हुये यह शीर्षक दिया - ब्लॉग की हॉफ लाइफ।

ब्लॉग रेडियोएक्टिव मेटीरियल की तरह विखण्डनीय फिनॉमिनॉ है। और विखण्डन/टूटन बहुत रेण्डम तरीके से होता है। हमारे खुद के इस ब्लॉग का विखण्डन दो महीने में हो गया था। पर फिर न जाने कैसे यह पुन: संश्लेषित हो गया और आज चारसौ बीस पोस्टों के पार ( ४२७ टु बी प्रिसाइस) चला आया है। फिर भी कह नहीं सकते कि इसका विखण्डन कब होगा।Confused

Monday, May 26, 2008

ब्लॉग सांख्यिकी - चिट्ठाजगत की नयी खिड़की


आजकल एक कारण जिससे में दिन में एक दो बार चिट्ठाजगत का पन्ना खोल लेता हूं, वह है आंकड़ों के बार/पाई चार्ट और उनसे मिलने वाली इनसाइट। आप चार प्रकार के चार्ट पा सकते हैं वहां पर -

  1. आज के प्रकाशित लेखों के पाई चार्ट।
  2. हर घण्टे प्रकाशित होने वाली पोस्टें
  3. हर दिन के एक्टिव ब्लॉग और पोस्टों की संख्या
  4. महीने दर महीने एक्टिव ब्लॉगों और पोस्टों की संख्या

आप जरा चिट्ठाजगत के इन चार्टों का अवलोकन करें -

Sunday, May 25, 2008

लाल कृष्ण अडवानी जी की किताब, बुद्धिमान उल्लू और गोजर


Adwani Bookमेरे दामाद और मेरी बिटिया ने अपनी शादी की साल गिरह पर मुझे अडवानी जी की ऑटोबायोग्राफी - My Country, My Life उपहार में दी है। मुझे पुस्तक से ज्यादा इस विचार से प्रसन्नता है कि वे १००० पेज की मोटी पुस्तक पढ़ने के लिये मुझे सुपात्र मानते हैं। यद्यपि पुस्तक की मोटाई देख कर ही उसे पढ़ने का कम, घूरते चले जाने का मन अधिक करता है!

Saturday, May 24, 2008

काक्रोचित अनुकूलन की दरकार


धरती का वातावरण पलट रहा है। गर्मियां आते ही ग्लोबल वार्मिंग का मन्त्रोच्चार प्रारम्भ हो जाता है। किसी दिन ग्रिड बैठ जाये तो यह मन्त्रोच्चार और भी नादमय हो जाता है। सर्दियों के आगमन पर निकट भविष्य में हिम युग आने की बात पढ़ने में आती है। गंगा मर रही हैं। एक पूरी पीढ़ी देव नदी को मार कर जीवन यापन कर रही है। रसायनों, प्रदूषण, पॉलीथीन, ओजोन परत में छेद, नाभिकीय कचरा... जाने क्या क्या हैं जान के बवाल।

Friday, May 23, 2008

वर्तमान भारत की छ: विनाशक गलतियां



india_flagभारत का राष्ट्र ध्वज
नानी पालकीवाला को आप पढ़ें तो वे कई स्थानों पर कहते नजर आते हैं कि वयस्क मताधिकार को संविधान में स्वीकार कर भारत ने बहुत बड़ी गलती की। और नानी जो भी कहते हैं उसे यूं ही समझ कर नहीं उड़ाया जा सकता।

नानी पालकीवाला के एक लेख का संक्षेप प्रस्तुत करता हूं, जिसमें उन्होने इस समय के भारत की छ: विनाशक गलतियों की बात कही है; और वयस्क मताधिकार की अवधारणा की गलती उसमें से पहली है।

Thursday, May 22, 2008

थोड़ा HTML तो जानना होगा ब्लॉगिंग के लिए


मेरी HTML सम्बन्धित पोस्ट पर पाठकों की टिप्पणियां हैं, कि:
  • हमें तो HTML की बेसिक जानकारी नहीं है।
  • यह तकनीकी बात तो सिर से निकल गयी।
  • देखते हैं, कोशिश करते हैं, बाकी अपना फील्ड नहीं है यह!
  • मान गए हजूर कि आप फ़ुल्टू तकनीकी हो, अपन के पल्ले तो पड़ता नई ये सब!
  • आप अपने ब्लॉग में पता नही क्या क्या करते रहते हैं ...
  • यदि समझ आ गया तो रिकॉर्ड स्थापित हो जाएगा।
  • पहले html की abcd सीखनी पड़ेगी।
  • आप लगता है भूल गये कि आपका ..... पत्ता इसीलिये कट गया था क्योंकि आप तकनीकी रूप से सक्षम पाये गये थे।