Saturday, April 11, 2009

स्वात : आतिश-ए-दोज़ख


गर आतिश-ए-दोज़ख बर रू-ए-जमीं अस्त।

हमीं अस्तो हमीं अस्तो हमीं अस्त!

 Swat
स्वात घाटी का नक्शा और चित्र, गूगल अर्थ से।


SwatFloggingफोटो लॉस एंजेलेस टाइम्स से।

यह पूरी पोस्ट चुरातत्वीय है। मेरा योगदान केवल भावना अभिव्यक्ति का है। आतिश-ए-दोज़ख से (मैं समझता हूं) अर्थ होता है नर्क की आग। बाकी मीन-मेख-मतलब आप निकालें।   


33 comments:

  1. ज्ञानदा,
    दुष्यंत साब का शेर याद आ रहा है,

    नज़रों में आ रहे हैं नज़ारे बहुत बुरे
    होठो पे आ रही है जुबां, और भी खराब...

    संदर्भ मेरी कमअक्ली से ग़लत भी हो सकता है, पर भाव यही है कि दुनियाभर के धर्मान्धों, कट्टर, अतिवादियों को दोज़ख़ की आग में जलना पड़े....और ये मुमकिन है तो इसकी जो भी कीमत हो सकती है, हम लोगों को अदा करनी चाहिए...

    ReplyDelete
  2. मीन-मेख-मतलब : ऐसा मंजर देखने के बाद क्या निकाला जाए सिवाय हालातों पे दुख जताने के.

    ReplyDelete
  3. इस के विरुद्ध हम एक जुट हो कर आवाज तो लगा सकते हैं।

    ReplyDelete
  4. क्या कहे ? ऐसे हालात अपने यहाँ भी हो सकते है अगर अभी भी नहीं चेते तो

    ReplyDelete
  5. It pains me to see such atrocities on a young girl whose fault was eastablished by the Zealots. :-(
    At such times, i ask where is GOD ?
    Why is HE , silent ?

    ReplyDelete
  6. कितना कुछ बदलता है, हमारे पाणिनि भी आज के पख्तून इलाके से थे. शायद ये भयानक सच हो कि उनकी संतति आज इन्ही लडाकों में से एक हो!

    ReplyDelete
  7. स्वात घाटी को पकिस्तान का स्विट्जरलैंड कहा जाता है. हमने बहुत ही खूबसूरत चित्र देखे थे परन्तु सहेज कर नहीं रखा.
    इस तरह के वहशी और निर्मम लोगों को सभ्य समाज झेल रहा है.!

    ReplyDelete
  8. पाकिस्तान में टेरर साइकिल का अंत अब आ लिया है, जिन तालिबानों को उन्होने पोसा था, वोही अब उन्हे कोस रहे हैं। इस्लामाबाद अब निशाने पर है। इस्लामाबाद पर काबिज तालिबान सिर्फ जरदारी की नहीं, दिल्ली की भी चिंता का सबब है। इस चुनावी हल्ले में ये इशू लगभग अननोटिस्ड जा रहा है।

    ReplyDelete
  9. आप भावना अभिव्यक्ति में सफल रहे .

    ReplyDelete
  10. पता नहीं ये लोग फिर से इंसान बाण पाएंगे या नहीं.. पर भविष्य के गर्भ में बहुत कुछ छिपा है.. हमारे समाज में भी पहले स्त्रियों के लिए सटी प्रथा थी.. विधवाओ के लिए अलग नियम थे.. वक़्त बदलता है.. वहा थोडी देर से बदलेगा.. पर बदलेगा..

    ReplyDelete
  11. जिन हाथों ने काडे फटकारे है उन्ही हाथों में पाकी परमाणू बम होगा. आगे स्थिति भयानक है. इसलिए भारत को मजबूत सरकार चाहिए, न की मौका परस्तों की.

    ReplyDelete
  12. She was flogged cause she was found with a guy who was not her husband. But I think that girl was very lucky cause flogging is very 'soft' pusnishment in 'Shariyat'. I have seen cutting of hands or stoning scenes on net.

    ReplyDelete
  13. आपकी भावना मे हम जैसे सैकड़ों-लाखो लोगो की भावनाएं छिपी हुई है।

    ReplyDelete
  14. कभी जन्नत को भी रश्क़ होगा इस सरज़मीन से. अब तो दोज़ख़ के शर्माने के ज़माने हैं.. ख़ुदा के नाम पे जो पाकीज़गी की जा रही है .... उन के ख़ुदा की तो क्या कहें .. हम जैसे कुछ इंसान ही शर्मसार हो लिया करें .....

    ReplyDelete
  15. सनाख्वाने-तक़दीज़े-मशरिख कहाँ है?
    जिन्हें नाज़ है मानवाधिकार पर वो कहाँ है?????

    ReplyDelete
  16. बहुत दर्द नाक हालात हैं. और दुख की बात है कि वहां कोई कुछ नही कर सकता. बहुत जघन्य और दिल को हिला दिया इस घटना ने.

    रामराम.

    ReplyDelete
  17. भाई ज्ञान जी,

    भले ही आपकी पोस्ट, जैसा की आप स्वीकारते हैं "पूरी पोस्ट चुरातत्वीय है।" किन्तु मानवीय हरकत के अधोपतन का जीता जागता नमूना है.

    किसी धर्म या महजब में ऐसी हरकत वन्दनीय नहीं.

    फिर महजब के नाम पर जंग लड़ने वालों पर लोग क्या स्वेच्छा से योगदान दे रहे है विशश्वत नहीं लगता, विश्श्वस्त तो यह लगता की लोगों में भयंकर भय पैदा करा कर जेहाद के नाम पर हर वो कुछ किया जा रहा है, जिसकी स्वीकृति किसी महजब में नहीं है.

    फोटो से भावना अभिव्यक्ति को शक्ति मिली , सत्य है पर आज ऐसे कृत्य कहाँ नहीं हो रहे हैं, बस नहीं है तो उसकी ऐसी तस्वीर.

    ऐसी तस्वीरें सामने न आने पाए इसके भी पुख्ता उपाए आजकल उठाय जाने लगे हैं.

    जहाँ हर गलत काम को सामने लाने पर रोक, टोक, परेशानियाँ, परिवार पर संकट जैसे खतरे हो वंहा ऐसे ही कृत्य अपना और प्रसार करेंगे इसमें तनिक भी संदेह नहीं और फिर लोहा ही लोहे को कटेगा यह भी निश्चित है.

    चन्द्र मोहन गुप्त

    ReplyDelete
  18. अरुन्धति रॉय कहाँ है?
    तीस्ता सेतलवाड कहाँ है?

    ReplyDelete
  19. यह दृश्य हृदय विदारक है.

    ReplyDelete
  20. kisi news site me pakistan ke liye ek report ke hawale se jo para tha, ise dekh ke yehi laga ki shartiya woh sahi ho sakta hai agar aisa hi chala to.

    lekin ye tay hai swarg aur nark isi duniya me hain, unhe dekhne ke liye marne ka intzar karne ki jaroorat nahi

    ReplyDelete
  21. 'चुरातत्वीय' पोस्ट के माध्यम से गूगल अर्थ का सुन्दर और लॉस एंजल्स टाइम्स का वीभत्स चित्र उपलब्ध कराने हेतु आभार.
    चित्र देखकर ऐसी शर्मनाक मानसिकता पर अफ़सोस ही जाहिर किया जा सकता है.

    ReplyDelete
  22. वास्तव में दोजख (नरक से क्या कम है) दिख रहा है . मानवता को चूर चूर करता हुआ चित्र.

    ReplyDelete
  23. सर, यह खबर देख कर बहुत ही दुःख हुआ था। परमात्मा सब को सदबुद्धि प्रदान करे, यही प्रार्थन है।

    ReplyDelete
  24. जिस समाज के सज्‍जन, निष्क्रिय और मौन रहें तथा दुर्जन सक्रिय और मुखर - वहां यह सब अनिवार्य और अपरिहार्य ही है।
    भारत भी इसी मुकाम पर चल पडा है। देखते जाइए, यहां भी यह सब होगा।

    ReplyDelete
  25. हमीं अस्तो हमीं अस्तो हमीं अस्त!

    ReplyDelete
  26. पाकिस्तान में टेरर साइकिल का अंत अब आ लिया है, जिन तालिबानों को उन्होने पोसा था, वोही अब उन्हे कोस रहे हैं। इस्लामाबाद अब निशाने पर है। इस्लामाबाद पर काबिज तालिबान सिर्फ जरदारी की नहीं, दिल्ली की भी चिंता का सबब है। इस चुनावी हल्ले में ये इशू लगभग अननोटिस्ड जा रहा है।

    ReplyDelete
  27. ज्ञानदा,
    दुष्यंत साब का शेर याद आ रहा है,

    नज़रों में आ रहे हैं नज़ारे बहुत बुरे
    होठो पे आ रही है जुबां, और भी खराब...

    संदर्भ मेरी कमअक्ली से ग़लत भी हो सकता है, पर भाव यही है कि दुनियाभर के धर्मान्धों, कट्टर, अतिवादियों को दोज़ख़ की आग में जलना पड़े....और ये मुमकिन है तो इसकी जो भी कीमत हो सकती है, हम लोगों को अदा करनी चाहिए...

    ReplyDelete

आपको टिप्पणी करने के लिये अग्रिम धन्यवाद|

हिन्दी या अंग्रेजी में टिप्पणियों का स्वागत है|
--- सादर, ज्ञानदत्त पाण्डेय