यह बुधवार का श्री पंकज अवधिया का स्वास्थ्य विषयक अतिथि लेख है। पंकज अवधिया वनस्पति वैज्ञानिक हैं और रायपुर में रहते हैं। उनके दूसरे ब्लॉग - पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान में आप को उनके इण्टरनेट पर उपलब्ध अनेक लेखों के लिंक मिलेंगे जो उनकी विस्मय में डाल देने वाली ऊर्जा और व्यापक ज्ञान से आपको परिचय करायेंगे। आप नीचे हल्दी के दांतो पर प्रयोग के विषय में लेख पढ़ें -

उत्तर: आपके प्रश्न के लिये धन्यवाद। दाँतो के लिये तो अनगिनत उपयोगी नुस्खे है पर मुश्किल यह है कि किसी भी एक उपाय को हम ज्यादा समय तक नहीं जारी रखते है। हमें जल्दी लाभ की आशा रहती है।
एक साधारण सा दिखने वाला नुस्खा बताता हूँ। यह नुस्खा है घर मे उपयोग की जाने वाली हल्दी का। रात को सोते समय हल्दी चूर्ण को मसूड़ों और दाँतो मे लगा लें। फिर कुछ समय बाद कुल्ला कर लें। याद रखे दाँतो पर इसे घिसना नही है। रात के समय यह करें। सुबह आप अपना मनचाहा मंजन या पेस्ट करे। हल्दी के प्रयोग के बाद मंजन न करे। सबसे पहला प्रभाव तो आपको मुँह मे ताजगी के अहसास से दिखेगा। शीघ्र ही दुर्गन्ध से भी मुक्ति मिल जायेगी। सबसे बडी बात है कि नयी समस्याएँ नही आयेंगी। इस प्रयोग में नियमितता बहुत जरूरी है।
हल्दी |
हल्दी के प्रयोग के बाद मंजन न करे। सबसे पहला प्रभाव तो आपको मुँह मे ताजगी के अहसास से दिखेगा। शीघ्र ही दुर्गन्ध से भी मुक्ति मिल जायेगी। सबसे बडी बात है कि नयी समस्याएँ नही आयेंगी।
यदि पारम्परिक चिकित्सकों की मानें तो हल्दी जितनी कम पीली हो उतनी ही अच्छी है। आपकी आँखो को अच्छा लगे इसलिये आजकल आकर्षक रंग मिलाये जाते हैं। हमारे देश मे रंगो पर सरकारी विभागो का कितना नियंत्रण है यह तो आप जानते ही हैं। हल्दी के साथ नमक और सरसो के तेल जैसे घटको को मिलाकर दसियों नये मिश्रण बनाये जा सकते हैं पर विशेषज्ञ इन्हे उचित मार्गदर्शन मे प्रयोग की सलाह देते हैं। मैने अनुभव किया है कि नमक का प्रयोग मुँह को लम्बे समय मे नुकसान पहुँचाता है। सरसो तेल की सनसनाहट से मुँह के स्वाद पर असर पड़ता है। अत: हल्दी का साधारण प्रयोग ही अधिक सीधा और सरल उपाय़ है।
इन विस्तारों से भयभीत न हों। किसी भी गुणवत्ता की हल्दी अपनायें; अपना सकारात्मक असर तो वह दिखायेगी ही।
पंकज अवधिया
पिछला अतिथि लेख: हर्रा या हरड़ - एक चमत्कारिक वनौषधि

ये फायदे मैने इण्टरनेट सर्च से उतारे हैं!
यह तो लगता है हमारे लिये खासकर आपने लिखवायी है। हमारे दांत फ़ुरसतिया पोस्ट की तरह लम्बे हैं और नेताऒं क तरह अस्थिर हैं। हल्दी लगता है इसीलिये हमारे घर में लगाई जाती है। किसी को चाहिये तो आये और ब्लागर-मीट के साथ हल्दी ले जाये। :)
ReplyDeleteऐसी काम की हल्दीरामी पोस्ट के लिए शुक्रिया।
ReplyDeleteअब तो आप ही ब्लाग एग्रीगेटर हुए जा रहे हैं जी। क्या आप भी नारद से कंपटीशन सा कर रहे हैं.
पर इस तरह के नुस्खे और पढ़वाइये।
हल्दी वाला दूध तो हम भी पीते हैं.. पर दाँत वाला प्रयोग तो अनोखा है.. आजमाया जाएगा..
ReplyDeleteकमाल का नुस्खा । हल्दी तुझमें कितने गुण । इस जानकारी के लिये धन्यवाद।
ReplyDeleteहल्दी के इस प्रयोग को बताने के लिये आपका और अवधिया जी का धन्यवाद.
ReplyDeleteआज ही इसको नियमित रूप से करते हैं ..बहुत अच्छी जानकारी दी है आपने :)
ReplyDeleteकिसी रिसर्च में यह भी सिद्ध हुआ है कि बुढ़ापे का स्मृति भ्रंश रोग -अल्जाइमर्स को हल्दी के प्रयोग से कुछ हद तक कम किया जा सकता है.
ReplyDeleteहल्दी दूध पीते भी हैं और पिलाते भी हैं. दाँतों पर इसका प्रयोग नया अनुभव होगा.
ReplyDeleteआपका और अवधिया जी का बहुत बहुत धन्यवाद..
गुड है जी!!
ReplyDeleteवैसे आपको मेरे दांतो के बारे मे किस सूत्र से जानकारी मिल गई आपको जो आपने इस्पेशली मेरे लिए यह पोस्ट लिखवा दी :)
शुक्रिया आप दोनो का!!
उपयोगी जानकारी
ReplyDeleteधन्यवाद। मस्त-निरापद जानकारी के लिए ।
ReplyDeleteइस उपयोगी जानकारी के लिए पंकज भईया एवं आपका आभार ।
ReplyDeleteये प्रयोग मैंने भी आजमाया हुआ है. सचमुच बहुत लाभकारी है.
ReplyDeleteउपयोगी जानकारी
ReplyDeleteचलिए। ज्ञान जी का हफ़्ते में एक दिन तो आराम हो ही गया। हाँ, सजावट में फिर भी मेहनत लगेगी ही :)
ReplyDeleteबातो ही बातो में आजकल आप काफी ज्ञान भी बांचने लगे हैं...
ReplyDeleteआप सबकी टिप्पणियो के लिये आभार। ज्यादातर पाठको ने दूध-हल्दी के प्रयोग के बारे मे लिखा है। यह निश्चित ही बहुत उपयोगी है। पर हम सब इसे अलग-अलग अनुपात और ढंग से प्रयोग करते है। जबकि सही असर के लिये निर्धारित अनुपात मे इसे प्रयोग करना चाहिये। मै इस पर आगे विस्तार से लिखूंगा पर अभी तो यही जान ले कि गाय, बकरी, भैस का दूध हो या गरम पानी सभी के साथ हल्दी के लाभो का स्तर अलग-अलग होता है। हमारे देश का पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान बहुत ही गूढ है और काफी अनुसन्धान के बाद विकसित हुआ है।
ReplyDeleteहल्दी के प्रयोग से दाँतो की देखभाल का प्रयोग आप करे। नियमितता पर ध्यान दे। और जैसा लिखा है कि इसे दाँतो पर घिसना नही है। इसका विशेष ध्यान रखे।
एक बार ज्ञान जी को फिर धन्यवाद जिन्होने आपके और मेरे बीच सशक्त ज्ञान सेतु का काम किया।