Saturday, January 23, 2010

हरी ऊर्जा क्रान्ति, भारत और चीन

बाजू में मैने मेकेंजी क्वाटर्ली (McKinsey Quarterly)  की लेखों की विजेट लगा रखी है। पता नहीं आप में से कितने उसे देख कर उसके लेखों को पढ़ते हैं। मैं बहुधा उसके लेखों को हार्ड कापी में निकाल कर फुर्सत से पढ़ता हूं। इसमें भारत और चीन विषयक लेख भी होते हैं।

Thursday, January 21, 2010

कोहरा

आज सवेरे कोहरे में दफ्तर आते समय दृष्यता २५-५० मीटर से अधिक न थी। वाहन अपनी हेडलाइट्स जलाये हुये थे। यह सवेरे १० बजे का हाल था।

पिछले कई दिनों से मेरी सोच कोहरे पर केन्द्रित है। उत्तर-मध्य रेलवे पर कई रीयर-एण्ड टक्क्तरें हुईं सवारी गाड़ियों की। इस बात पर प्रश्न चिन्ह लगने लगे कि हमारे कोहरे के दौरान ट्रेन संचालन के नियम पुख्ता हैं या नहीं? नियम आज के नहीं हैं – दशकों पुराने हैं और कई कोहरे के मौसम पार करा चुके हैं। फिर भी उनका पुनर्मूल्यांकन जरूरी हो जाता है, और हुआ भी।

Friday, January 15, 2010

ब्लॉगिंग की सीमायें

कहां रुके एक ब्लॉगर? मैं सोचता हूं, सो मैं पोस्ट बनाता हूं। सोच हमेशा ही पवित्र होती तो मैं ऋषि बन गया होता। सोचने में बहुत कूछ फिल्थ होता है। उच्छिष्ट! उसे कहने का भी मन नहीं होता, पोस्ट करने की बात दूर रही। जिस सोच के सम्प्रेषण का मन करे, वह बात पोस्ट बनाने की - ब्लॉगिंग की एक सीमा बनती है। सही साट।

Wednesday, January 13, 2010

मालगाड़ी के इंजन पर ज्ञानदत्त

footplate1 इलाहाबाद में आती मालगाड़ी, जिसपर मैने फुटप्लेट निरीक्षण किया। नेपथ्य में कोहरे के अवशेष देख सकते हैं आप।

यह कोई नई बात नहीं है। रेलवे इंजन पर चढ़ते उतरते तीसरे दशक का उत्तरार्ध है। पर रेलवे के बाहर इंजन पर फुटप्लेट निरीक्षण (footplate inspection) को अभिव्यक्त करने का शायद यह पहला मौका है।

मुझे अस्सी के दशक के पूर्वार्ध में रतलाम के आस-पास भाप के इंजन पर अवन्तिका एक्स्प्रेस का फुटप्लेट निरीक्षण अच्छी तरह याद है। उसके कुछ ही समय बाद भाप के इंजन फेज-आउट हो गये। उनके बाद आये डीजल और बिजली के इंजनों में वह पुरानेपन की याद नहीं होती।

Sunday, January 10, 2010

पाठक बनाम अनियत प्रेक्षक (irregualar gazer/browser)

भाई साहब, माफ करें, आप जो कहते हैं ब्लॉग में, अपनी समझ नहीं आता। या तो आपकी हिन्दी क्लिष्ट है, या फिर हमारी समझदानी छोटी। – यह मेरे रेलवे के मित्र श्री मधुसूदन राव का फोन पर कथन है; मेरी कुछ ब्लॉग पोस्टों से जद्दोजहद करने के बाद। अदूनी (कुरनूल, रायलसीमा) से आने वाले राव को आजकल मेरे ब्लॉग की बजाय तेलंगाना बनाम सम्यक-आंध्र की खबरों में ज्यादा दिलचस्पी होगी।

राव मेरा बैचमेट है, लिहाजा लठ्ठमार तरीके से बोल गया। अन्यथा, कोई ब्लॉगर होता तो लेकॉनिक कमेण्ट दे कर सरक गया होता।

Saturday, January 9, 2010

देर आये, दुरुस्त आये?!

Rathore

यह जो हो रहा है, केवल मीडिया के दबाव से संभव हुआ है। और बहुत कम अवसर हैं जिनमें मीडिया का प्रशस्ति गायन का मन होता है।

Friday, January 8, 2010

साहस की ब्लॉगिंग

बेनामी ब्रैगिंग (bragging - डींग मारना) करते हैं। छद्म नामधारी बूंकते हैं विद्वता। कोई ऑब्स्क्योर व्यक्ति रविरतलामी को कहते हैं मरियल सा आदमी। साहस ही साहस पटा पड़ा है हिन्दी ब्लॉग जगत में। यह सियारों और कायरों की जमीन नहीं है। (हम जैसे जो हैं; वे) बेहतर है कि वे छोड़ जायें, बन्द कर लें दुकान।

Wednesday, January 6, 2010

“थ्री इडियट्स” या “वी इडियट्स”

कल यह फिल्म देखी और ज्ञान चक्षु एक बार पुनः खुले। यह बात अलग है कि उत्साह अधिक दिनों तक टिक नहीं पाता है और संभावनायें दैनिक दुविधाओं के पीछे पीछे मुँह छिपाये फिरती हैं। पर यही क्या कम है कि ज्ञान चक्षु अभी भी खुलने को तैयार रहते हैं।

Sunday, January 3, 2010

हिन्दी सेवा का प्रवचन

बड़ी थू-थू में-में हो रही है हिन्दी ब्लॉगरी में। जिसे देखो, उगल रहा है विष। गुटबाजी का यह कमाल है कि अश्लीलता का महिमामण्डन हो रहा है। व्यक्तिगत आक्षेप ब्लॉग साहित्य का अंग बन गया है। जिसको देखो, वही पोस्ट हटाने, टिप्पणी हटाने का लीगल नोटिस जेब में धर कर चल रहा है।

अगर हिन्दी ब्लॉगरी इस छुद्रता का पर्याय है तो भगवान बचाये।

Friday, January 1, 2010

भावी प्रधानमंत्री का स्टिंगॉपरेशन

Nattu Pandey and Mother नत्तू पांड़े की माई की सख्त हिदायत थी कि उसके सुपुत्र का कोई न्यूड वीडियो न लिया जाये। उसको यह आशंका है कि इस वीडियो का (भविष्य में) नत्तू की शादी के अवसर पर ब्लैक मेल करने हेतु दुरुपयोग हो सकता है।

मेरे जैसे तहलकाई के पास कोई चारा न बचा सिवाय स्टिंग ऑपरेशन (हिन्दी में क्या कहेंगे – डंक-संचालन या दंश-अभियान/दंशाभियान?) के। बाथ रूम में जब नत्तू पांड़े को नहलाया जा रहा था तो उनका खिड़की से वीडियो उतार लिया!