tag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post5848215616937256083..comments2008-03-22T16:44:33.649+05:30Comments on ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल: बिजनेस अखबारों की मायूसीGyandutt Pandeyhttp://www.blogger.com/profile/05293412290435900116noreply@blogger.comBlogger16125tag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-89283759789065004112008-03-22T16:11:00.000+05:302008-03-22T16:11:00.000+05:30बहुत बढ़िया होली पर्व की आपको रंगीन हार्दिक शुभकाम...बहुत बढ़िया होली पर्व की आपको रंगीन हार्दिक शुभकामनाmahendra mishrahttp://www.blogger.com/profile/05186719974225650425noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-73183430817554364052008-03-22T05:14:00.000+05:302008-03-22T05:14:00.000+05:30पुराणिक जी की सलाह के अनुसार दूसरे और तीसरे एक्स ...पुराणिक जी की सलाह के अनुसार दूसरे और तीसरे एक्स को मिलाने पर जो पैक्स उभरते हैं, सच मानिए उसी से पहले एक्स के एस चढ़ते हैं. यह मिलावट या कहें कि मिलीभगत नहीं हो पा रही है इसीलिए सेनसेक्स की नाव डगमगा, डगमगाती तो भी ठीक था, अभी तो डूबी जा रही है और डूबे जा रहे हैं निवेशकों के दिल, दिमाग और .... <BR/>अब और भी खुलकर बतलाना होगा क्या ...<BR/>घालमेल में क्या आनंद आता है इसे महसूसने के लिए नीचे दिया गया लिंक चटकाईये और अपनी बेबाक राय देने से मत घबराईये<BR/>hindi.org/vyangya/2008/cricketholi.htm<BR/><BR/>होली पर आपकी तबीयत कमल के फूल के माफिक फूल फूल जाएगी. <BR/>- अविनाश वाचस्पतिझकाझक टाइम्सhttp://jhhakajhhaktimes.blogspot.com/noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-22907450250199917632008-03-22T02:40:00.000+05:302008-03-22T02:40:00.000+05:30आजकल खासकर निवेश का विषय बहुत बीहड़ है, डूबने की उ...आजकल खासकर निवेश का विषय बहुत बीहड़ है, डूबने की उम्मीद ज्यादा तरने की कम - बहरहाल होली की शुभ कामनाएं - सादर - मनीषजोशिमhttp://www.blogger.com/profile/08624620626295874696noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-91624911627102338182008-03-21T13:11:00.000+05:302008-03-21T13:11:00.000+05:30आलोक पुराणिक की सलाह मत मानिएगा. बहुत फालतू टैप के...आलोक पुराणिक की सलाह मत मानिएगा. बहुत फालतू टैप के आदमी हैं. अभी हाल ही में बीच वाले एक्स पर ध्यान लगाने के चलते कालेज में इनका सम्मान हुआ है. इनको तो कोई फर्क पड़ता नहीं, लेकिन आप अपनी सोच लीजिए.इष्ट देव सांकृत्यायनhttp://www.blogger.com/profile/06412773574863134437noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-40670744395703764312008-03-21T12:57:00.000+05:302008-03-21T12:57:00.000+05:30जहाँ व्यावसायिकता हावी हो , वहाँ मर्यादाओं की परिक...जहाँ व्यावसायिकता हावी हो , वहाँ मर्यादाओं की परिकल्पना अधूरी रह जाती है , आपके विचार अत्यन्त सटीक है , दिनेश जी ने ठीक ही कहा है ,कि " इसे पढ़ कर कइयों की होली मायूस हो जाएगी।" आपको होली की कोटिश: बधाईयाँ !रवीन्द्र प्रभातhttp://www.blogger.com/profile/11471859655099784046noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-1872255335352258062008-03-21T12:17:00.000+05:302008-03-21T12:17:00.000+05:30आपके विद्वान दिखने की ललकवाले विचार पर आलोक पुराणि...आपके विद्वान दिखने की ललकवाले विचार पर आलोक पुराणिक की सतही टिप्पणी.<BR/>यही तो अखबारवाले कंपनी रिपोर्टर भी करते हैं.संजय तिवारीhttp://www.blogger.com/profile/13133958816717392537noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-74707300990890905072008-03-21T12:02:00.000+05:302008-03-21T12:02:00.000+05:30मेरा तो यही सुझाव है कि आलोक जी के नेतृत्व मे अर्थ...मेरा तो यही सुझाव है कि आलोक जी के नेतृत्व मे अर्थ-व्यवस्था पर चर्चा करने एक कम्युनिटी ब्लाग बनाये। यह अभी के बिजनेस अखबारो को मात कर देगा। एक से बढकर एक विशेषज्ञ है हमारे ब्लाग जगत मे।पंकज अवधिया Pankaj Oudhiahttp://www.blogger.com/profile/06607743834954038331noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-88153130471524073812008-03-21T11:13:00.000+05:302008-03-21T11:13:00.000+05:30काकेश जी के कहने के बाद मै बस इत्ता कर सकता हूं कि...काकेश जी के कहने के बाद मै बस इत्ता कर सकता हूं कि राखी सावंत को ढूंढ के ला सकता हूं इधर ;)Sanjeet Tripathihttp://www.blogger.com/profile/18362995980060168287noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-91707072798711590692008-03-21T10:36:00.000+05:302008-03-21T10:36:00.000+05:30अखबार वालों को पन्ने भरना है। जब सेन्सेक्स लगातार ...अखबार वालों को पन्ने भरना है। जब सेन्सेक्स लगातार अधोगामी होता है, तो आर्थिक अखबार स्यापा करने लगते हैं। पुरानी खबरें और इतिहास छापते हैं। पिछले दिनों दलाल स्ट्रीट में लुटे पिटे एक पुराने पापी से मेरी बात हुई थी। वे बता रहे थे, अभी 13000 तक नीचे आएगा, उस के बाद सोचेंगे कुछ खरीद की। यह खबर 15 दिन पुरानी है, किसी अखबार ने नहीं छापी। आप चाहें तो टिप्पणी में से भी हटा दें। इसे पढ़ कर कइयों की होली मायूस हो जाएगी। हम तो इस बाजार के बारे में पढ़-सुन कर आनन्द प्राप्त कर लेते हैं। जैसे मॉल में घूमें तीन घंटे, खर्च ना करें एक पैसा और चाय पिएं, बाहर जा कर थडी वाले के यहाँ। होली-पर्व आप को सपरिवार आनन्द प्रदान करे।दिनेशराय द्विवेदीhttp://www.blogger.com/profile/00350808140545937113noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-5333762951948975522008-03-21T09:58:00.000+05:302008-03-21T09:58:00.000+05:30सुबह पढ़ा ..पर टिप्पणी नहीं की क्योंकि आलोक जी की ट...सुबह पढ़ा ..पर टिप्पणी नहीं की क्योंकि आलोक जी की टिप्पणी की प्रतीक्षा थी. <BR/><BR/>आलोक जी ने अब तीन एक्स बता दिये अब ये आप पर है आप किस पर ध्यान लगाते हैं. <BR/>दूसरे वाले एक्स के लिये कहें तो राखी या मल्लिका का पता आलोक जी से पूछ्कर बता सकते हैं.. :-) <BR/><BR/>बकिया जमाये रहिये जी ...काकेशhttp://www.blogger.com/profile/12211852020131151179noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-58648472011961008302008-03-21T08:58:00.000+05:302008-03-21T08:58:00.000+05:30भारतीय मीडिया और एक हद अर्थशास्त्र तीन किसिम के एक...भारतीय मीडिया और एक हद अर्थशास्त्र तीन किसिम के एक्स पर चलता है<BR/>एक्स नंबर वन सेनसेक्स<BR/>एक्स नंबर टू सेक्स <BR/>एक्स नंबर थ्री मल्टीप्लेक्स<BR/>एक एक्स ठंडा पड़ा हो, तो बाकी के एक्स पर मन लगायें। <BR/>वैसे जब त्राहिमाम् हो रहा हो, तो यह समय खऱीदने का होता है। मेरे पास तो सारे पैसे खत्म हो गये हैं। मार्च का महीना वैसे भी मारु होता है।<BR/>वैसे अगर आईएफसीआई, आईडीएफसी और जे पी एसोसियेट्स च रिलायंस इंडस्ट्री में रकम लगायेंगे, तो मजे रहेंगे। <BR/>वैसे, सेक्स और सेनसेक्स में अत्यधिक दिलचस्पी सेहत के लिए घातक है। <BR/>यह चेतावनी बहुत जरुरी है। <BR/>आज रकम लगाकर तीन साल बाद सेनसेक्स देखें, मजा आयेगा। <BR/>विस्तार से आगे कुछ सेनसेक्सी पोस्टों में बताया जायेगा।ALOK PURANIKhttp://www.blogger.com/profile/09657629694844170136noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-50505545673810968502008-03-21T08:44:00.000+05:302008-03-21T08:44:00.000+05:30भइयाआपकी अपील के हिसाब से अलोक जी टिपण्णी करेंगे ह...भइया<BR/>आपकी अपील के हिसाब से अलोक जी टिपण्णी करेंगे ही. इसलिए उनकी टिपण्णी आज मैं कर देता हूँ.<BR/><BR/>"जमाये रहिये जी".....:-)Shiv Kumar Mishrahttp://www.blogger.com/profile/16210136982521324733noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-77193094858683641852008-03-21T08:38:00.000+05:302008-03-21T08:38:00.000+05:30ज्ञानजी, क्या हमने कभी कहा है कि रेलवे का मुनाफा क...ज्ञानजी, <BR/>क्या हमने कभी कहा है कि रेलवे का मुनाफा कम हो जाये? हम तो चाहते हैं कि ये दिन दूना रात चौगुना बढे | फ़िर आप क्यों कच्चे तेल में आग लगने की बात कहकर हमारे पेट पर लात मार रहे हैं :-)<BR/><BR/>अक्सर ऐसा ही होता है, जब कालेज में थे तो खूब साफ्टवेयर सुना, पास होने के ठीक पहले गुल हो गया | अभी तेल कम्पनिया खूब कमा रही हैं और हमारे डाक्टर बनने के आस पास ही कहीं बत्ती गुल न हो जाये :-) तेल पर किया पूरा शोध धरा रह जायेगा :-)Neeraj Rohillahttp://www.blogger.com/profile/09102995063546810043noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-39540894222357244782008-03-21T08:08:00.000+05:302008-03-21T08:08:00.000+05:30Rip Van winkle !! ये भली याद करी आपने ज्ञान भाई सा...Rip Van winkle !! <BR/>ये भली याद करी आपने ज्ञान भाई साहब ...अमरीका मान भी महंगाई का पूछिये नाही ..बुरा हाल हुई रहा है ..Lavanyam - Antarmanhttp://www.blogger.com/profile/15843792169513153049noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-73698573481953544912008-03-21T08:02:00.000+05:302008-03-21T08:02:00.000+05:30अर्थव्यवस्था का अर्थ समझने में लगे हैं हम भी और शा...अर्थव्यवस्था का अर्थ समझने में लगे हैं हम भी और शायद पेपर वाले भी तभी इधर उधर पलटी मारते रहते हैं ये सफेद गुलाबी पन्ने रंगने वाले।Tarunhttp://www.readers-cafe.netnoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-88652350868034465962008-03-21T07:03:00.000+05:302008-03-21T07:03:00.000+05:30रिप वान विंकल -हम नहीं जानते।बकिया चकाचक है। आलोक ...रिप वान विंकल -हम नहीं जानते।<BR/>बकिया चकाचक है। आलोक पुराणिक की टिप्पणी का हमें भी इंतजार है।अनूप शुक्लhttp://www.blogger.com/profile/07001026538357885879noreply@blogger.com