tag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post145030794179036788..comments2008-03-25T05:38:56.526+05:30Comments on ज्ञानदत्त पाण्डेय की मानसिक हलचल: हैरीपॉटरीय ब्लॉग की चाहतGyandutt Pandeyhttp://www.blogger.com/profile/05293412290435900116noreply@blogger.comBlogger13125tag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-15001876678723565322008-03-24T22:22:00.000+05:302008-03-24T22:22:00.000+05:30हैरी पाटर के बारे में कभी लिखते और उसकी तुलना प्रे...हैरी पाटर के बारे में कभी लिखते और उसकी तुलना प्रेमचन्द की कहानी ईदगाह के पात्र हामिद से करते हुये हमने एक लेख लिखा था <A HREF="http://hindini.com/fursatiya/?p=30" REL="nofollow">हैरी का जादू और हामिद का चिमटा।</A> इस लेख में मैंने लिखा था-<BR/><B>मुझे न जाने क्यों‘ईदगाह’ कहानी के कुछ पन्ने हैरी पाटर के हजारों पन्नों पर भारी लगते हैं तथा हामिद का चिमटा हैरी के किसी भी जादू से ज्यादा आत्मविश्वास से भरा लगता है। कारण शायद यह भी है कि हामिद का सच मुझे अपना सच लगता है जबकि हैरी पाटर का सच किसी का सच नहीं है सिवाय चंद लोगोंकी फंतासी के।</B><BR/>इस पर ई-स्वामी की प्रतिक्रिया दिलचस्प थी। उन्होंने लिखा था-<B>हामिद का चिमटा उन तमाम बच्चों को गिल्ट देता है जिन्होंने मध्यमवर्गिय परिवारों मे भी पैदा हो कर बाल हठ किये होंगे - सारे हामिद जैसे स्याने नही होते इस का ये मतलब नही की बाकी बच्चे अपने माता-पिता की आर्थिक सीमितता नही समझे होंगे, बाल-मन है खिलौना चाहेगा. और उन तमाम मा-बाप को ये शिक्षा देता है की तुम्हारा बच्चा हामिद है या नही इस की लिटमस टेस्ट लो और ना हो तो पडोसी की औलाद हामिद है वो नही है ये तुलना करने से मत चूको!क्या ये नही होता? क्या ये नही हुआ?? भाड मे गया हामिद और उसका चिमटा - मेरी चले तो ये कहानी कालिज के लेवल पर कोर्स मे होना चाहिए स्कूल के लेवल पर नही! गिल्ट-मांगरीग देसी मेन्टेलिटी को प्रमोट करती है ये कहानी!!</B><BR/>इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मैंने लिखा था- <A HREF="http://hindini.com/fursatiya/?p=32 " REL="nofollow">ईदगाह अपराध बोध की नहीं जीवन बोध की कहानी है। </A><BR/>तो मुझे लगता है कि हम अपने आसपास के हामिद की कहानी कहते-सुनते-लिखते रहें। कल को शायद इनमें से ही कोई कथा सबकी कथा बन जायेगी। इस कथा को कहने में सब समर्थ हैं जो हामिद को अपना समझते हैं। है कि नहीं ?अनूप शुक्लhttp://hindini.com/fursatiyanoreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-6162779142705403452008-03-24T20:09:00.000+05:302008-03-24T20:09:00.000+05:30हैरी पोटर का देसी संस्करण वाकई दिलचस्प होगा , कोई ...हैरी पोटर का देसी संस्करण वाकई दिलचस्प होगा , कोई तो पहल करे !रवीन्द्र प्रभातhttp://www.blogger.com/profile/11471859655099784046noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-26603525198924597172008-03-24T18:53:00.000+05:302008-03-24T18:53:00.000+05:30तो कौन लिखेगा 'हरिया पुत्तर' का देसी आख्यान ?अज़दक ...तो कौन लिखेगा 'हरिया पुत्तर' का देसी आख्यान ?<BR/>अज़दक या फ़ुरसतिया ?Priyankarhttp://www.blogger.com/profile/13984252244243621337noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-54554242608107742352008-03-24T18:34:00.000+05:302008-03-24T18:34:00.000+05:30मीनाक्षी जी, सातवीं किताब अभी तक की सबसे वज़नदार(पन...मीनाक्षी जी, सातवीं किताब अभी तक की सबसे वज़नदार(पन्नों की संख्या के मामले में) और महंगी है। अब तो आए हुए भी लगभग एक वर्ष हो गया, सुपुत्रों को दिला ही दीजिए अब। :)amit guptahttp://www.amitgupta.in/noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-24327637087039228622008-03-24T16:06:00.000+05:302008-03-24T16:06:00.000+05:30हैरी पॉटर की आखिरी किताब अभी खरीदनी बाकि है. बेटों...हैरी पॉटर की आखिरी किताब अभी खरीदनी बाकि है. बेटों के लिए महान ग्रंथों से कम नहीं.. हिन्दी में लिखने के लिए जो नाम आपने सुझाए हैं, हम भी सहमत हैं और इंतज़ार में अभी से लग गए. शायद आप ही शुरु कर दें कभी.मीनाक्षीhttp://www.blogger.com/profile/06278779055250811255noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-20688490074526602572008-03-24T14:41:00.000+05:302008-03-24T14:41:00.000+05:30तो कौन अपनी कलम चला रहा है, हरी-पुत्र लिखने के लिए...तो कौन अपनी कलम चला रहा है, <B>हरी-पुत्र </B>लिखने के लिए ....संजय बेंगाणीhttp://www.blogger.com/profile/07302297507492945366noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-39310138999941720742008-03-24T13:00:00.000+05:302008-03-24T13:00:00.000+05:30आप रेल पर कम लिख पाते है कुछ कारणवश और हम रेल पर आ...आप रेल पर कम लिख पाते है कुछ कारणवश और हम रेल पर आपको पढना चाहते है। अब समस्या सुलझेगी। आप इस नये पात्र पर लिखिये पर बीच-बीच मे उसे रेल पर चढा दीजियेगा। इससे रेल का पूरा वर्णन मिल जायेगा। :)पंकज अवधिया Pankaj Oudhiahttp://www.blogger.com/profile/06607743834954038331noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-42165726712823866672008-03-24T12:13:00.000+05:302008-03-24T12:13:00.000+05:30हैरी पोटर तो हमने भी नही पढ़ा है हाँ फ़िल्म जरुर ...हैरी पोटर तो हमने भी नही पढ़ा है हाँ फ़िल्म जरुर एक आध देखी है।<BR/> अब आप इसे लिखना शुरू कर ही दीजिये .mamtahttp://www.blogger.com/profile/05350694731690138562noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-13590860155785047522008-03-24T10:46:00.000+05:302008-03-24T10:46:00.000+05:30तो कोशिश शुरू कर दी जाए हिन्दी में नए हैरी पोटर की...तो कोशिश शुरू कर दी जाए हिन्दी में नए हैरी पोटर की?इष्ट देव सांकृत्यायनhttp://www.blogger.com/profile/06412773574863134437noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-1901787932983118522008-03-24T10:32:00.000+05:302008-03-24T10:32:00.000+05:30फुरसतिया और अज़दक में वाकई पूरी संभावना है आपकी चा...फुरसतिया और अज़दक में वाकई पूरी संभावना है आपकी चाहत को पूरा करने की।<BR/>वैसे गांधी जैसी शख्सियत पर विवाद इसलिए हो जाता है कि हमें इतिहास का पूरा ज्ञान नहीं कराया जाता। मैं तो कहता हूं कि My experiments with truth ही कोई पढ़ ले तो उसे गांधी के असली व्यक्तित्व का पूरा ज्ञान हो जाएगा।अनिल रघुराजhttp://www.blogger.com/profile/07237219200717715047noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-26828658208784253172008-03-24T10:21:00.000+05:302008-03-24T10:21:00.000+05:30हैरी पोटरी की फील्ड में कूदना का मन नहीं है। मेरे ...हैरी पोटरी की फील्ड में कूदना का मन नहीं है। मेरे उस्ताद ने एक बार मुझे समझाया था कि जो भी काम करना जमकर करना। बढ़िया घटिया की चिंता ना करना। ताकि श्रद्धांजलि के टैम पे लोग इतना तो कह पायें कि आलोक पुराणिक ने व्यंग्य बहुत लिखा। <BR/>कैसा लिखा, यह सवाल इस बयान के बोझ में दब जायेगा कि बहुत लिखा था।यूं लाइफ में फोकस बहुत नहीं रख पाया हूं। पर लेखन के मामले में अब तक किलियर हूं कि व्यंग्य और व्यंग्य।<BR/>और फिर सब कुछ चौपट करने की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ मेरी ही थोड़ी ना है। <BR/>कुछ चौपट बाकी लोग भी करें। <BR/>आपसे और अनूप शुक्लजी से मुझे बहुत उम्मीदें हैं।ALOK PURANIKhttp://www.blogger.com/profile/09657629694844170136noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-77299942889820254102008-03-24T08:29:00.000+05:302008-03-24T08:29:00.000+05:30सर, आप ने सही कहा. बापू पर इस देश में किसी भी तर...सर, आप ने सही कहा. बापू पर इस देश में किसी भी तरह की प्रतिक्रिया से आश्चर्य नहीं होना चाहिए. मेरी सोच बहुत सीमित है लेकिन फिर भी अगर समयाभाव न हो और अगर आप उचित समझें तो ये पढ़ / सुन कर भी देखें :<BR/>http://kisseykahen.blogspot.com/2008/02/posts.html<BR/>और हो सके तो "आज ये दिल उदास सा क्यों है ?" भी ...मीतhttp://www.blogger.com/profile/06968972033134794094noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7822286262846371486.post-87384031891997525052008-03-24T08:05:00.000+05:302008-03-24T08:05:00.000+05:30गांधी जी पर बात करें या मार्क्स पर विवाद तो सामने ...गांधी जी पर बात करें या मार्क्स पर विवाद तो सामने आएंगे ही। लेकिन उन दोनों के महान होने में भी आपत्ति नहीं हो सकती। वही स्थिति भगतसिंह की भी है और मुन्शी प्रेमचन्द की भी। खैर!<BR/>आप हिन्दी में किसी हैरी-पॉटरीय के बारे में सोच रहे हैं वह भी ब्लॉग पर तो उत्तम बात है एक चीज हिन्दी ब्लॉग पर आ जाए तो हिन्दी ब्लॉगिंग के पाठकों की संख्या बढ. जाएगी पोस्ट सप्ताह में एक बार आएगी और छह दिनों तक केवल टिप्पणियों से ही काम चल जाएगा।दिनेशराय द्विवेदीhttp://www.blogger.com/profile/00350808140545937113noreply@blogger.com